
*शांति समिति की चेतावनी बेअसर, प्रशासन मौन?*
आष्टा। पूरे मध्य प्रदेश में इस समय परीक्षाओं का दौर चल रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में छात्रों को शांत वातावरण मिले, इसके लिए हाल ही में आष्टा में आयोजित शांति समिति की बैठक में अनुविभागीय अधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि शहर में शासकीय दफ्तरों, स्कूलों और प्राइवेट शिक्षण संस्थानों के आसपास डीजे नहीं बजाया जाएगा।
बैठक में यह भी माना गया था कि तेज ध्वनि से न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि हृदय रोगियों और बुजुर्गों को भी गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।
कन्नौद रोड पर तेज डीजे, सोशल मीडिया पर चर्चा
शहर के बीचो-बीच स्थित कन्नौद रोड क्षेत्र में हाल ही में तेज ध्वनि में डीजे बजने की घटना सामने आई। बताया जा रहा है कि इसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी जोरों से हुई, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई। सवाल यह उठ रहा है कि क्या शांति समिति की बैठकें सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई हैं?
छात्रों और मरीजों को हो रही परेशानी
परीक्षा की तैयारी में जुटे विद्यार्थियों का कहना है कि तेज आवाज के कारण एकाग्रता भंग हो रही है। वहीं हार्ट मरीजों और बुजुर्गों के परिजनों ने भी चिंता जताई है कि इस तरह की ध्वनि प्रदूषण से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
नाबालिगों के हाथ में वाहन, सड़कों पर खतरा
डीजे के शोर के साथ-साथ शहर में एक और गंभीर समस्या सामने आ रही है—नाबालिग बच्चों के हाथों में दोपहिया और चारपहिया वाहन। तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण आम नागरिकों को सड़कों पर चलना मुश्किल हो रहा है। कई स्थानों पर लोगों ने दुर्घटना की आशंका जताई है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शांति समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों का पालन नहीं होगा, तो उनका कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। परीक्षा के इस दौर में सख्ती से ध्वनि नियंत्रण और नाबालिग वाहन चालकों पर कार्रवाई की जरूरत है, ताकि विद्यार्थियों को शांत माहौल मिल सके और शहर की सड़कों पर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।






